बिलासपुर। अरपा व छत्तीसगढ़ की अन्य नदियों की हो रही दुर्दशा को लेकर मिले पत्रों को चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन ने गंभीरता से लिया है। लिखे गए अलग-अलग पत्र को जनहित याचिका के रूप में दायर करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एक सप्ताह का समय तय किया है। स्टेट बार कौंसिल व अन्य सामाजिक संगठनों ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर अरपा नदी सहित प्रदेश की अन्य नदियों का जिक्र किया है। पत्र में कहा गया था कि नदियों का संरक्षण न होने के कारण लगातार प्रदूषित हो रही हैं। इसके अलावा रेत के अवैध उत्खनन के चलते नदियों का स्वरूप तेजी के साथ बिगड़ने लगा है। नदियां अपने पुराने स्वरूप को खोती जा रही हैं।
वकील अरविंद कुमार ने भी चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर इस संबंध में राज्य शासन सहित अन्य जिम्मेदार विभाग को निर्देशित करने की मांग की है। वकील अरविंद कुमार इस मामले की खुद ही पैरवी कर रहे हैं। मंगलवार को पत्र को लेकर चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने नदियों के संरक्षण के साथ ही नदियों के पानी के प्रदूषण को लेकर उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके लिए एक सप्ताह की मोहलत दी है। जनहित याचिका दायर होने के बाद सुनवाई शुरू होगी।
पत्र का अंग्रेजी में अनुवाद करने का आदेश
चीफ जस्टिस ने अलग-अलग संस्थाओं व स्टेट बार कौंसिल द्वारा नदियों के संरक्षण और प्रदूषण से मुक्ति की मांग को लेकर हिंदी में लिखे गए पत्रों का अंग्रेजी में अनुवाद कराने का भी आदेश जारी किया है। अंग्रेजी में पत्रों के रुपांतरण के बाद इसे पीआईएल के साथ शामिल किया जाएगा ।


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